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*2 मिनट अपनी संस्कृति की झलक को पढ़े। By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब ◆,1 जनवरी को क्या नया हो रहा है?◆न ऋतू बदली ...न मौसम!◆न कक्षा बदली... न सत्र!◆न फसल बदली...न खेती!◆न पेड़ पोधों की रंगत!◆न सूर्य चाँद सितारों की दिशा!◆ना ही नक्षत्र!!◆1 जनवरी आने से पहले ही सब नववर्ष की बधाई देने लगते हैं।मानो कितना बड़ा पर्व है।◆नया एक दिन का नही होता कुछ दिन तो नई अनुभूति होंनी ही चाहिए। हमारा देश त्योहारों का देश है।ईस्वी संवत का नया साल 1जनवरी को और भारतीय नववर्ष ( विक्रमी संवत)चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है।आईये देखते हैं दोनों का तुलनात्मक अंतर।1- *प्रकृति*1जनवरी कोई अंतर नही जैसा दिसम्बर वैसी जनवरी। चैत्र मास में चारो तरफ फूल खिल जाते हैं, पेड़ो पर नए पत्ते आ जाते हैं।चारो तरफ हरियाली मानो प्रकृति नया साल मना रही हो।2- *वस्त्र*दिसम्बर और जनवरी में व्ही उनी वस्त्र।कंबल रजाई ठिठुरते हाथ पैर चैत्र मास में सर्दी जा रही होती है गर्मी का आगमन होने जा रहा होता है ।3- *विद्यालयो का नया सत्र*दिसंबर जनवरी वही कक्षा कुछ नया नही। जबकि मार्च अप्रैल में स्कूलो का रिजल्ट आता है नई कक्षा नया सत्र यानि विद्यालयों में नया साल।4- *नया वित्तीय वर्ष*दिसम्बर जनबरी में कोई खातो की क्लोजिंग नही होती। जबकि 31 मार्च को बैंको की(audit) कलोसिंग होती है नए वही खाते खोले जाते है।सरकार का भी नया सत्र शुरू होता है।5- *कलैण्डर*जनवरी में नया कलैण्डर आता है। चैत्र में नया पंचांग आता है उसी से सभी भारतीय पर्व, विवाह और अन्य महूर्त देखे जाते हैं ।इसके बिना हिन्दू समाज जीबन की कल्पना भी नही कर सकता इतना महत्व पूर्ण है ये कैलेंडर यानि पंचांग।6- *किसानो का नया साल*दिसंबर जनवरी में खेतो में व्ही फसल होती हैजबकि मार्च अप्रैल में फसल कटती है नया अनाज घर में आता है तो किसानो का नया वर्ष का उतसाह ।7- *पर्व मनाने की विधि*31 दिसम्बर की रात नए साल के स्वागत के लिए लोग जमकर मदिरा पान करते है, हंगामा करते है ,रात को पीकर गाड़ी चलने से दुर्घटना की सम्भावना, रेप जैसी बारदात,पुलिस प्रशासन बेहाल,और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विनाश जबकि भारतीय नववर्ष व्रत से शुरू होता है पहला नवरात्र होता है घर घर मे माता रानी की पूजा होती है।शुद्ध सात्विक वातावरण बनता है।8- ऐतिहासिक महत्त्व1 जनवरी का कोई ऐतेहासिक महत्व नही हैजबकि चैत्र प्रतिपदा के दिन महाराज विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् की शुरुआत भगवान झूलेलाल का जन्म।नवरात्रे प्रारंम्भ,ब्रहम्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना, इत्यादि का संबंध इस दिन से है।अंग्रेजी कलेंडर की तारीख और अंग्रेज मानसिकता के लोगो के अलावा कुछ नही बदला....अपना नव संवत् ही नया साल है।जब ब्रह्माण्ड से लेकर सूर्य चाँद की दिशा,मौसम,फसल,कक्षा,नक्षत्र,पौधों की नई पत्तिया,किसान की नई फसल,विद्यार्थी की नई कक्षा,मनुष्य में नया रक्त संचरण आदि परिवर्तन होते है। जो विज्ञान आधारित है।*अपनी मानसिकता को बदले।**विज्ञान आधारित भारतीय काल गणना को पहचाने।**स्वयं सोचे की क्यों मनाये हम 1 जनवरी को नया वर्ष केबल कैलेंडर बदलें। अपनी संस्कृति नही।**आओ जगे जगाये**भारतीय संस्कृति अपनाये* ।। जय श्री राधे जी ।।,

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बजरंगबली मेरी नाव चली, करुना कर पार लगा देना। By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब🙏हे महावीरा हर लो पीरा, सत्माराग मोहे दिखा देना।।🙏दुखों के बादल गिर आयें, लहरों मे हम डूबे जाएँ।🙏हनुमत लाला, तू ही रखवाला, दीनो को आज बचा लेना।।🙏सुख देवनहारा नाम तेरा, पग पग पर सहारा नाम तेरा।🙏भव भयहारी, हे हितकारी, कष्टों से आज छुड़ा देना।।🙏हे अमरदेव, हे बलवंता, तुझे पूजे मुनिवर सब संता।🙏संकट हारना लागे शरणा, श्री राम से मोहे मिला देना।।🙏,

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*💕मेरा श्याम मेरी जिंदगी💕* By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤भरोसा मुझे श्याम का,बिगड़ी मेरी बना देता,जब भी लडखडाऊँ,आके मेरा हाथ थाम लेतादेख रहा है सारा ज़माना,. श्याम तेरी मेरी यारी है,मैं तो आई कितनी बार तेरे घर,आजा प्यारे अब तो तेरी बारी है ।।…❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤🌹🌿*🙏जय श्री श्याम जी🙏🌿*🌹,

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जो आये शरण तिहारी,विपदा मिट जाये सारी.by Vnita kasnia Punjab .हम सब पर कृपा रखना,ओ जगत के पालनहारी..मैं आरती तेरी गाऊँ,ओ केशव कुंजबिहारी..मैं नित नित शीश नवाऊँ,ओ मोहन कृष्ण मुरारी.......✍️*🙏 जय श्री कृष्णा जी 🙏*,

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2020: तीन पत्तियों वाला बिल्व पत्र क्यों है भगवान शिव को इतना प्रिय🕉️ By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब🙏🏻 शिव को प्रिय है बिल्व पत्रभगवान शिव की पूजा में यूं तो कई चीजों का उपयोग किया जाता है लेकिन कहा जाता है कि अगर शिव को अर्पित करने के लिए आपके पास कुछ भी न हो तो सिर्फ एक बेल की पत्ती चढ़ा देने मात्र से ही शिव प्रसन्न हो जाते हैं। लेकिन अगर सारी सामाग्री भी हो और बिल्व पत्र न हो तो भोलेनाथ की पूजा अधूरी मानी जाती है तो आखिर शिव को क्यों इतना प्रिय है बिल्व पत्र, जानते हैं...बेलवृक्ष के नीचे शिवलिंग रखकर पूजा करने से घर में सुख,समृद्धि आती हैमहादेव को आशुतोष भी कहा गया है क्योंकि वे केवल एक बिल्व पत्र चढ़ाने से भी प्रसन्न हो जाते है। बिल्व पत्र में तीन पत्तियां होती है जिन्हें तीनों देवों ब्रह्मा, विष्णु, महेश का प्रतीक मानते हैं। इस कारण भी बिल्व पत्र का विशेष महत्व है। कई पुराणो में इसकी महिमा बताई गई है तो वहीं शिव पुराण में भी इसका विस्तार से वर्णन किया गया है। शिवपुराण के अनुसार बिल्वपत्र स्वयं भगवान शिव का प्रतीक है। जो लोग बेल के वृक्ष के नीचे शिवलिंग रखकर पूजन करता है, तो उसके घर में हमेशा सुख-समृद्धि रहती है।बिल्वपत्र का महत्वपौराणिक कथा के अनुसार जब समुद्रमंथन के समय शिव जी ने हलाहल विष का पान किया था तब उनके कंठ की जलन को शांत करने के लिए बिल्व पत्र अर्पण किया गया था। ताकि विष का असर कम हो जाए। कहा जाता है कि तभी से शिव को बिल्व पत्र चढ़ाया जाता है। बिल्व पत्र की तीन पत्तियां भगवान शिव के तीन नेत्रों का भी प्रतीक हैं। इसलिए भी इसका बहुत महत्व है। बिल्व पत्र चढ़ाने से भगवान शिव और माता पार्वती दोनों प्रसन्न होते हैं। कैसे हुई बिल्वपत्र की उत्पत्तिस्कंद पुराण के अनुसार बेल के वृक्ष की उत्पत्ति माता पार्वती के ललाट की पसीने की बूंदो से हुई। एक बार माता पार्वती ने अपने ललाट से पसीने के पोंछकर फेंका तो कुछ बूंदे मंदार पर्वत पर जा गिरी। कहा जाता है कि उन्हीं से बेलवृक्ष की उत्पत्ति हुई। बेल के वृक्ष की जड़ में देवी गिरिजा, तने में महेश्वरी, पत्तियों में माता पार्वती, टहनियों में दक्षयायनी,फूलों में गौरी तो वहीं फलों में मां कात्यायनी निवास करती हैं। बिल्व पत्र चढ़ाने से भगवान शिव और माता पार्वती दोनों प्रसन्न होते हैं। बिल्व पत्र चढ़ाते समय इस मंत्र का जाप करें'त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम। त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम।अर्थात् हे तीन गुणों तीन नेत्र, त्रिशूल को धारण करने वाले शिव जी में आपको तीन जन्मों के पापों का संहार करने वाले शिव में आपको बिल्वपत्र अर्पित करता हूं। बिल्व पत्र को तोड़ने का नियमबिल्व पत्र को तोड़ने से पहले भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए। बिल्व पत्र को कभी टहनियों सहित न तोड़े। चतुर्थी,नवमी, अष्टमी, चतुर्दशी,और अमावस्या तिथि को बिल्वपत्र तोड़ना वर्जित होता है। संक्रांंति और सोमवार के दिन भी बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिए।,

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कन्हैया-कन्हैया, By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब पुकारा करेंगे, लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे |कहीं तो मिलेंगे, वो बाँके-बिहारी |उन्हीं के चरण चित लगाया करेंगे ||कन्हैया-कन्हैया, पुकारा करेंगे |लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे ||1||बनाकर के हृदय में, हम प्रेम-मन्दिर |वहीं उनको झूला झुलाया करेंगे ||कन्हैया-कन्हैया, पुकारा करेंगे |लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे ||2||उन्हें हम बिसाएंगे, आँखों में दिल में |उन्हीं से सदा लौ लगाया करेंगे ||कन्हैया-कन्हैया, पुकारा करेंगे |लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे ||3||जो रूठेंगे हम से, वो बाँके-बिहारी |चरण पड़ उन्हें हम मनाया करेंगे ||कन्हैया-कन्हैया, पुकारा करेंगे |लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे ||4||उन्हें प्रेम-डोरी से, हम बाँध लेंगे |तो फिर वो कहाँ भाग जाया करेंगे ||कन्हैया-कन्हैया, पुकारा करेंगे |लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे ||5||जिन्होंने छुड़ाए थे, गज के वो बंधन |वही मेरे संकट मिटाया करेंगे ||कन्हैया-कन्हैया, पुकारा करेंगे |लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे ||6||उन्होंने नचाए थे, ब्रह्मांड सारे |मगर अब उन्हें हम नचाया करेंगे ||कन्हैया-कन्हैया, पुकारा करेंगे |लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे ||7||जय बिहारी जी की श्री हरिदास🌹🕉️ जय श्री राधे कृष्णा 🕉️🌹,

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